Wednesday, 8 July 2020

संत रामपाल जी महाराज जी की संघर्ष यात्रा

संत रामपाल जी महाराज जी की जीवन यात्रा कैसे प्रारंभ हुई

संत रामपाल जी का जन्म 8 सितम्बर 1951 को गांव धनाना जिला सोनीपत हरियाणा में एक किसान परिवार में हुआ। पढ़ाई पूरी करके हरियाणा प्रांत में सिंचाई विभाग में जूनियर इंजिनियर की पोस्ट पर 18 वर्ष कार्यरत रहे। सन् 1988 में परम संत रामदेवानंद जी से दीक्षा प्राप्त की तथा तन-मन से सक्रिय होकर स्वामी रामदेवानंद जी द्वारा बताए भक्ति मार्ग से साधना की तथा परमात्मा का साक्षात्कार किया।
इस भक्ति मार्ग में कितनी परेशानियां आईं, कितने कष्ट आये, कितनी ही बार गलत अफवाहें फैलाई गईं लेकिन सन्त रामपाल जी महाराज जी ने असत्य के सामने झुकने के बजाय सत्य की कांटों भरी राह पर ही चलना स्वीकार किया क्योंकि संतजी जानते हैं कि आज जिस राह में कांटे हैं, कल उसी राह में फूल भी खिलेंगे।

जितना संघर्ष सन्त रामपाल जी महाराज जी ने सत्य को ऊपर लाने और परमात्मा का ज्ञान पूरे विश्व में फैलाने के लिये किया, इतना शायद किसी और में नहीं किया होगा। फिर भी सन्त रामपाल जी महाराज जी ने कभी ऊफ तक नहीं की। क्योंकि वो हमारे पिता हैं और पिता चाहे खुद दुख पा ले लेकिन अपने बच्चों को कभी भी दुखी नहीं देख सकते हैं।

जो लोग सन्त रामपाल जी महाराज जी को साधारण इंसान मान रहे हैं वो अपने आप को अभी तक अंधेरे में ही रखे हुए हैं, जब वो धर्मराज के पास जाएंगे तब अपने इस गुनाह को याद करके रोयेंगे और पछतायेंगे क्योंकि, वहां उन्हें बचाने कोई नहीं आएगा। तब उन्हें समझ में आएगा कि सन्त रामपाल जी महाराज जी उसी कबीर परमात्मा के अवतार हैं जिन्हें पहचानने में हमने पहले भी गफलत कर दी। लेकिन अब परमात्माने हमारे ऊपर दया की है, फिर से पहचानने का एक मौका दिया। इस मौके को अब हाथ से जाने मत देना वरना ये गलती हमें चौरासी के कष्टों तक पहुंचा देगी।

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